ग़म-ए-जहाँ हो रुख़-ए-यार हो कि दस्त-ए-अदू*,
सुलूक जिस से किया हम ने आशिक़ाना किया|
*Enmity
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds
ग़म-ए-जहाँ हो रुख़-ए-यार हो कि दस्त-ए-अदू*,
सुलूक जिस से किया हम ने आशिक़ाना किया|
*Enmity
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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