गेसू फ़ज़ा में लहराए!

शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम,
शब-ए-फ़िराक़ के गेसू फ़ज़ा में लहराए|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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