आज किस ने सुख़न!

ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया,
फिर आज किस ने सुख़न हम से ग़ाएबाना* किया|

*Unseen

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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