चराग़ाँ हम नहीं कहते!

तुम्हारे जश्न को जश्न-ए-फ़रोज़ाँ हम नहीं कहते,
लहू की गर्म बूँदों को चराग़ाँ हम नहीं कहते|

जाँ निसार अख़्तर

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