बिजलियाँ भर पाँव में आगे ज़माने से निकल,
बन गया जो तू ग़ुबार-ए-रह-गुज़र देखेगा कौन|
मंज़र भोपाली
A sky full of cotton beads like clouds
बिजलियाँ भर पाँव में आगे ज़माने से निकल,
बन गया जो तू ग़ुबार-ए-रह-गुज़र देखेगा कौन|
मंज़र भोपाली
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