जहाँ से किनारा करो!

काम आए न मुश्किल में कोई यहाँ मतलबी दोस्त हैं मतलबी यार हैं,
इस जहाँ में नहीं कोई अहल-ए-वफ़ा ऐ ‘फ़ना’ इस जहाँ से किनारा करो|

फ़ना निज़ामी कानपुरी

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