सदक़ा उतारा करो!

ये तबस्सुम ये आरिज़ ये रौशन जबीं ये अदा ये निगाहें ये ज़ुल्फ़ें हसीं,
आइने की नज़र लग न जाए कहीं जान-ए-जाँ अपना सदक़ा उतारा करो|

फ़ना निज़ामी कानपुरी

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