ऐसा बनना सँवरना मुबारक तुम्हें कम से कम इतना कहना हमारा करो,
चाँद शरमाएगा चाँदनी रात में यूँ न ज़ुल्फ़ों को अपनी सँवारा करो|
फ़ना निज़ामी कानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
Leave a comment