मय-कदे का नज़ारा!

फ़िक्र-ए-उक़्बा की मस्ती उतर जाएगी तौबा टूटी तो क़िस्मत सँवर जाएगी,
तुम को दुनिया में जन्नत नज़र आएगी शैख़ जी मय-कदे का नज़ारा करो|

फ़ना निज़ामी कानपुरी

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