जाम ले कर छलकता!

ख़ूबसूरत घटाओं-भरी रात में लुत्फ़ उठाया करो ऐसी बरसात में,

जाम ले कर छलकता हुआ हाथ में मय-कदे में भी इक शब गुज़ारा करो|

फ़ना निज़ामी कानपुरी

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