आज-कल है वहाँ!

लाखों तूफ़ान कि जिस दिल में बसे रहते थे,
आज-कल है वहाँ आराम ख़ुदा ख़ैर करे|

बाल स्वरुप राही

2 responses to “आज-कल है वहाँ!”

  1. Beautiful poem 💞

    Liked by 2 people

Leave a comment