मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’,
टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल|
शकील आज़मी
A sky full of cotton beads like clouds
मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’,
टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल|
शकील आज़मी
Leave a comment