ग़म-ए-जहाँ से जिसे !

ग़म-ए-जहाँ से जिसे हो फ़राग़ की ख़्वाहिश,
वो उन के दर्द-ए-मोहब्बत से साज़-बाज़ करे|

हसरत मोहानी

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