निगाह-ए-यार जिसे!

निगाह-ए-यार जिसे आश्ना-ए-राज़ करे,
वो अपनी ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे क्यूँ न नाज़ करे|

हसरत मोहानी

Leave a comment