तिरे जुनूँ का ख़ुदा!

दिलों को फ़िक्र-ए-दो-आलम से कर दिया आज़ाद,
तिरे जुनूँ का ख़ुदा सिलसिला दराज़ करे|

हसरत मोहानी

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