बंद कर के मिरी आँखें वो शरारत से हँसे,
बूझे जाने का मैं हर रोज़ तमाशा देखूँ|
परवीन शाकिर
A sky full of cotton beads like clouds
बंद कर के मिरी आँखें वो शरारत से हँसे,
बूझे जाने का मैं हर रोज़ तमाशा देखूँ|
परवीन शाकिर
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