काश संदल से मिरी माँग उजाले आ कर,
इतने ग़ैरों में वही हाथ जो अपना देखूँ|
परवीन शाकिर
A sky full of cotton beads like clouds
काश संदल से मिरी माँग उजाले आ कर,
इतने ग़ैरों में वही हाथ जो अपना देखूँ|
परवीन शाकिर
Leave a comment