हमसफ़र कोई नहीं!

बाइस-ए-रश्क़ है तन्हारवी-ए-रहरौ-ए-शौक़,
हमसफ़र कोई नहीं दूरी-ए-मंजिल के सिवा।

अली सरदार जाफ़री

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