चश्म-ए-बेवफ़ा को!

तुझे किस नज़र से देखे ये निगाह-ए-दर्दआगीं,
जो दुआयें दे रही है तेरी चश्म-ए-बेवफ़ा को।

अली सरदार जाफ़री

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