मियाँ ये क़र्ज़-दारी!

जहाँ तक हो सके ‘आलम किसी से क़र्ज़ मत लेना,
मियाँ ये क़र्ज़-दारी ख़ैर-ओ-बरकत छीन लेती है|

आलम निज़ामी

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