शगुफ़्ता ताज़गी दी है!

बहुत दिल कर के होंटों की शगुफ़्ता ताज़गी दी है,
चमन माँगा था पर उस ने ब-मुश्किल इक कली दी है|

जाँ निसार अख़्तर

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