मिरी आँखों को आँसू!

मोहब्बत ना-रवा तक़्सीम की क़ाएल नहीं फिर भी,
मिरी आँखों को आँसू तेरे होंटों को हँसी दी है|

जाँ निसार अख़्तर

Leave a comment