तुम्हीं ने शाइरी दी है!

कहाँ मुमकिन था कोई काम हम जैसे दिवानों से,
तुम्हीं ने गीत लिखवाए तुम्हीं ने शाइरी दी है|

जाँ निसार अख़्तर

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