किए जाएँ सख़्तियाँ!

अच्छा है अहल-ए-जौर किए जाएँ सख़्तियाँ,
फैलेगी यूँ ही शोरिश-ए-हुब्ब-ए-वतन तमाम|

हसरत मोहानी

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