आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ।
इनकी कोई रचना मैंने पहले शेयर नहीं की है।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह जी की यह कविता –

स्वप्न…
कच्ची नींद का पाहुन,
बेवफ़ा है,
– दीठ से…भागे
पीठ-पीछे कोसने को
बंद पलकों में
सदा जागे,
एक खुशबू से बदल दे राह,
एक धूप न जी सके
जिसकी रतीली चाह,
जोड़ ले कड़ियाँ संझाती
शिखाओं की,
– छोड़ दे घड़ियाँ रुलाती
उषाओं की,
स्वप्न…
टूटी बीन की धड़कन,
दोरुख़ा है!
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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