ये जो लाल रंग पतंग!

ये जो लाल रंग पतंग का सर-ए-आसमाँ है उड़ा हुआ,

ये चराग़ दस्त-ए-हिना का है जो हवा में उस ने जला दिया|

मुनीर नियाज़ी

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