कोई अपना वहम था!

कोई ऐसी बात ज़रूर थी शब-ए-व’अदा वो जो न आ सका,
कोई अपना वहम था दरमियाँ या घटा ने उस को डरा दिया|

मुनीर नियाज़ी

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