आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मधुर शास्त्री जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ।
मधुर शास्त्री जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मधुर शास्त्री जी का यह गीत –

इतना प्यार न देना मुझको दुःख के बोल न मैं सुन पाऊँ
यों मेरे जीवन उपवन में
श्वास तुम्हारी ही बहती है
मेरे गीतों के गुंजन में
गूँज तुम्हारी ही रहती है
इतनी मधुर बहार न देना झरते फूल न मैं चुन पाऊँ
यों मेरी अन्तर साधों को
एक तुम्हारा ही संबल है
प्राण तुम्हारी नयन ज्योति से
मेरा जीवन पथ उज्ज्वल है
इतना अधिक प्रकाश न देना तुम में पन्थ न मैं लख पाऊँ
यों नयनों में स्वप्न तुम्हारी
जीवन आभा का दर्पण है
युग-युग के संचित आँसू से
खोया प्यार तुम्हें अर्पण है
लेकिन इतने साथ न रहना तुम बिन पाँव न मैं रख पाऊँ
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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