गुल खिले जाते हैं वो!

गर्मी-ऐ-शौक़-ऐ-नज़ारा का असर तो देखो,
गुल खिले जाते हैं वो साया-ए-तर तो देखो|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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