न पढ़ सकेगा बशर!

हर इक की अपनी ज़बाँ है न पढ़ सकेगा बशर,
ज़मीं पे आब-ओ-हवा से लिखा हुआ इक नाम|

कृष्ण बिहारी नूर

Leave a comment