बढ़ कर याद आते हैं!

हक़ीक़त खुल गई ‘हसरत’ तिरे तर्क-ए-मोहब्बत की,
तुझे तो अब वो पहले से भी बढ़ कर याद आते हैं|

हसरत मोहानी

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