मैं भी सुर्ख़-रू हो जाऊँ!

मिरी हथेली पे होंटों से ऐसी मोहर लगा,
कि उम्र-भर के लिए मैं भी सुर्ख़-रू हो जाऊँ|

मुनव्वर राना

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