गुलशन में इस तरह से कब आई थी फ़स्ल-ए-गुल,
हर फूल अपनी शाख़ से टूटा हुआ सा है|
शहरयार
A sky full of cotton beads like clouds
गुलशन में इस तरह से कब आई थी फ़स्ल-ए-गुल,
हर फूल अपनी शाख़ से टूटा हुआ सा है|
शहरयार
Leave a comment