बस अब तो ‘इश्क़ है!

बस अब तो ‘इश्क़ है हिज्र-ओ-विसाल कुछ भी नहीं,
ये टुकड़ा ज़ीस्त का दिन में है और न रात में है|

कृष्ण बिहारी नूर

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