बदन से लिपट गई!

तिरी याद आए तो चुप रहूँ ज़रा चुप रहूँ तो ग़ज़ल कहूँ,
ये ‘अजीब आग की बेल थी मिरे तन-बदन से लिपट गई|

बशीर बद्र

#Memories

#Silence, #WritingGhazal

#CreeperOfFire

Leave a comment