आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ|
ठाकुर प्रसाद सिंह जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का यह नवगीत –

पर्वत पर आग जला बासन्ती रात में
नाच रहे हैं हम-तुम हाथ दिए हाथ में
धन मत दो, जन मत दो
ले लो सब ले लो
आओ रे लाज भरे
खेलो सब खेलो
होठों पर वंशी हो, हवा हँसे झर-झर
पास भरा पानी हो, हाथों में मादर
फिर बोलो क्या रखा
दुनिया की बात में ?
हाथ दिए हाथ में
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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