रम्ज़ ओ इशारा जाने!

मेहर ओ वफ़ा ओ लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं,
और तो सब कुछ तंज़ ओ किनाया रम्ज़ ओ इशारा जाने है|

मीर तक़ी मीर

Leave a comment