दिल ही दुश्मन हैं!

अपनी नज़रों में गुनाहगार न होते, क्यों कर,
दिल ही दुश्मन हैं मुख़ालिफ़ के गवाहों की तरह|

सुदर्शन फ़ाकिर

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