हिले ठंडी हवाओं में!

घिरा बादल ख़मोशी से ख़िज़ाँ-आसार बाग़ों पर,

हिले ठंडी हवाओं में शजर आहिस्ता आहिस्ता|

मुनीर नियाज़ी

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