पहले सहर न कर दे!

ये वस्ल की रात है ख़ुदारा नक़ाब चेहरे से मत हटाओ,
तुम्हारे चेहरे का ये उजाला सहर से पहले सहर न कर दे|

क़तील शिफ़ाई

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