दामन तर न कर दे!

सताया जिस को हमेशा तू ने सदा अकेला जो छुप के रोया,
वो दिल-जला अपने आँसुओं से तुम्हारा दामन भी तर न कर दे|

क़तील शिफ़ाई

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