दर-ब-दर न कर दे!

बना हूँ मैं आज तेरा मेहमाँ कोई अदू को ख़बर न कर दे,
उठा के वो तेरी अंजुमन से कहीं मुझे दर-ब-दर न कर दे|

क़तील शिफ़ाई

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