कहीं वो दीवाना उम्र!

क़सम जिसे ज़ब्त-ए-ग़म की दे कर उठा दिया अपने दर से तू ने,
कहीं वो दीवाना उम्र अपनी बग़ैर तेरे बसर न कर दे|

क़तील शिफ़ाई

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