अब तो सोने दो!

शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तो अब तो सोने दो,
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता|

अमीर मीनाई

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