बाहर खेती-बारी रख!

आज एक बार फिर मैं, विख्यात कवि एवं राजनेता श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ|

उदयप्रताप जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयप्रताप सिंह जी कि यह ग़ज़ल –


बाहर खेती-बारी रख
आँगन में फुलवारी रख

थोड़ी दुनिया दारी रख
प्यार मुहब्बत जारी रख

यादें मधुर संजोने को
मन में एक अलमारी रख

ठहर मुसाफिरखाने में
चलने की तैयारी रख

भूत, भविष्यत जाने दे
वर्तमान से यारी रख

डंडी देख तराज़ू की
मन का पलड़ा भारी रख

चमक देखनी हीरे की
पृष्ठ भूमि अंधियारी रख

उदय ह्रदय के अनुभव सुन
ये बातें अखबारी रख

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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2 responses to “बाहर खेती-बारी रख!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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