यूँ सजा चाँद कि!

यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग,
यूँ फ़ज़ा महकी कि बदला मिरे हमराज़ का रंग|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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