तिरी आवाज़ का रंग!

साया-ए-चश्म में हैराँ रुख़-ए-रौशन का जमाल,
सुर्ख़ी-ए-लब में परेशाँ तिरी आवाज़ का रंग|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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