छोड़ कर वहम!

छोड़ कर वहम-ओ-गुमाँ हुस्न-ए-यकीं तक पहुँचो,
पर यक़ीं से भी कभी वहम-ओ-गुमाँ तक आओ|

अली सरदार जाफ़री

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