फूल के गिर्द फिरो!

फूल के गिर्द फिरो बाग़ में मानिन्द-ए-नसीम,
मिस्ल-ए-परवाना किसी शम-ए-तपाँ तक आओ|

अली सरदार जाफ़री

Leave a comment