मुझे तू क्या समझा!

मेरा हर शेर है इक राज़-ए-हक़ीक़त ‘बेख़ुद’,
मैं हूँ उर्दू का ‘नज़ीरी’ मुझे तू क्या समझा|

बेख़ुद देहलवी

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